नई दिल्ली.
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को आरजेएस पीबीएच-आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में तीन महीने के अंतरराष्ट्रीय शाकाहार एवं वीगन जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। यह अभियान 31 दिसंबर तक चलेगा। इसका उद्देश्य शिक्षण संस्थानों, परिवारों और सामाजिक संगठनों के बीच संतुलित प्राकृतिक आहार, खानपान की शुद्धता और जीव-दया के प्रति चेतना जगाना है। इस अवसर पर भगवान बुद्ध, भगवान महावीर और महात्मा गांधी व शास्त्री जी (2 अक्टूबर जयंती)को भी याद किया गया।
आयोजकों ने घोषणा की कि इस अभियान के तहत दिल्ली-एनसीआर सहित विभिन्न क्षेत्रों के विद्यालयों और सामुदायिक केंद्रों में हर महीने कम से कम पांच जागरूकता बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इसमें विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को लक्षित किया जाएगा। अभियान का समापन अगले वर्ष जनवरी में 19वें प्रवासी भारतीय दिवस और 78वें गणतंत्र दिवस पखवाड़े के दौरान एक विशाल प्राकृतिक आहार संकल्प सम्मेलन के रूप में होगा, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों को मांसाहार और पशु-शोषण मुक्त आहार अपनाने का संकल्प दिलाया जाएगा।
इस संगोष्ठी में प्रमुख सरकारी अस्पतालों के पोषण विशेषज्ञ, सामाजिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा ब्रिटेन और थाईलैंड में भारतीय मूल के सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। परिचर्चा में आधुनिक जीवनशैली के चलते छोटे बच्चों में पनप रही गंभीर बीमारियों, प्रसंस्कृत जंक फूड के खतरों, व्यावसायिक डेयरी उद्योग की क्रूरताओं और पर्यावरण संतुलन पर विस्तार से विचार किया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बैंकॉक इंटरनेशनल वीगन अलायंस के संस्थापक और मुख्य संरक्षक पॉर्नथेप श्रीनरुला (आचार्य पॉल नरूला) ने व्यावसायिक डेयरी फार्मों की आंतरिक स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 42 वर्ष पूर्व बैंकॉक के पास एक बड़े डेयरी फार्म के निरीक्षण के दौरान गायों पर होने वाले अत्याचार को देखकर उन्होंने दूध और दुग्ध उत्पादों का त्याग कर दिया था। नरूला ने कहा कि व्यावसायिक लाभ के लिए मवेशियों को निरंतर कृत्रिम गर्भाधान, एंटीबायोटिक्स और हार्मोनल इंजेक्शन के सहारे रखा जाता है। बछड़ों को मां के दूध से वंचित कर दिया जाता है, नर बछड़ों को कुछ ही हफ्तों में मांस के लिए बेच दिया जाता है और दूध देने की क्षमता खत्म होते ही गायों को कत्लखानों में भेज दिया जाता है।
नरूला ने कहा कि भारत में गाय को पूजनीय माना जाता है, किंतु यह एक विडंबनापूर्ण सांख्यिकीय तथ्य है कि भारत गोमांस और चमड़े के उत्पादों के सबसे बड़े वैश्विक निर्यातकों में शामिल है। वर्ष 1991 में गांधी जयंती पर स्थापित अपनी संस्था के 35 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि आगामी 10 अक्टूबर से थाईलैंड में शुरू हो रहे नौ दिवसीय शाकाहारी महोत्सव में भाग लेने के लिए अमेरिका से वीगन कार्यकर्ताओं का 20 सदस्यीय दल आ रहा है। उन्होंने थाईलैंड के बौद्ध मठों में भिक्षुओं को अहिंसक और वीगन आहार अपनाने के लिए चलाए जा रहे संवाद कार्यक्रमों की जानकारी भी दी।
लंदन से जुड़े इंडियन वेजिटेरियन सोसाइटी के संस्थापक और एमबीई से सम्मानित नितिन मेहता ने महात्मा गांधी के जीवन का प्रसंग प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि 4 सितंबर 1888 में लंदन जाने से पूर्व गांधीजी ने अपनी माता के समक्ष एक जैन मुनि की उपस्थिति में मांसाहार न करने की प्रतिज्ञा ली थी, जो आगे चलकर उनके नैतिक जीवन और अहिंसा दर्शन का आधार बनी।
नितिन मेहता आरजेएस पाॅजिटिव ब्रांच, लंदन यूके के मानद प्रभारी भी हैं । उन्होंने कहा कि आज ब्रिटेन, जर्मनी और स्विट्जरलैंड जैसे यूरोपीय देशों में पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण के प्रति जागरूकता के कारण लाखों लोग मांसाहार छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगभग आठ अरब की मानव आबादी के लिए सौ अरब से अधिक पशुओं को पैदा कर उनका पालन-पोषण करना पृथ्वी के जल और भूमि संसाधनों पर असहनीय बोझ डाल रहा है, जो जलवायु संकट का मुख्य कारण है।
श्री मेहता ने भारतीय परिवारों को बाजार में मिलने वाले अत्यधिक पनीर के सेवन से बचने की सलाह देते हुए कहा कि केवल आहार बदलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित व्यायाम और योग को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने भारत से होने वाले बीफ निर्यात को बंद कराने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को एक विस्तृत मांग पत्र भेजने का समर्थन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जैन इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन के कार्यकारी अध्यक्ष और श्री दिगंबर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनिंद्र जैन ने कहा कि शाकाहार और अहिंसा केवल किसी एक पंथ या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह वैश्विक कल्याण का विषय है। सऊदी अरब यात्रा से लौटे डॉ. जैन ने बताया कि अब खाड़ी देशों के प्रमुख शहरों में भी शाकाहारी भोजनालय खुल रहे हैं। उन्होंने पूर्वी अफ्रीकी देश इथियोपिया के एक पारंपारिक उपवास का उदाहरण दिया, जिसमें लोग कई हफ्तों तक दूध और मांस का पूरी तरह त्याग करते हैं।
डॉ. जैन ने अभियान के तहत विद्यालयों में बांटी जाने वाली प्रचार सामग्री और पत्रकों के मुद्रण का खर्च उठाने और शिक्षण संस्थानों में संवाद सत्र आयोजित कराने में पूर्ण सहयोग की घोषणा की। उन्होंने बताया कि आगामी 22 नवंबर को गोवा में 11 एकड़ क्षेत्र में स्थापित किए जा रहे सनातन आश्रम का शिलान्यास राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा, जिसका उद्देश्य अहिंसा और प्राकृतिक जीवनशैली का प्रसार करना है। इसके अतिरिक्त अशोकनगर, ललितपुर और झांसी में माता के अस्पतालों का निर्माण शुरू किया गया है तथा आगामी 5 अक्टूबर को श्रीलंका यात्रा के दौरान स्थानीय सांसदों के साथ सांस्कृतिक व आहार संबंधी विषयों पर चर्चा की जाएगी।
नई दिल्ली स्थित अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान एवं डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉ. मनीषा वर्मा ने कहा कि प्रकृति सम्मत पारंपरिक आहार से दूरी और अत्यधिक प्रसंस्कृत पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के उपभोग ने नई पीढ़ी के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में पांच से दस वर्ष की उम्र के बच्चों में फैटी लीवर, कम उम्र का मधुमेह और मोटापा तेजी से सामने आ रहा है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि शाकाहारी भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को आवश्यक पोषण देने वाला होना चाहिए। इसके लिए संतुलित थाली की अवधारणा को अपनाना जरूरी है। उन्होंने थाली के विभाजन की रूपरेखा बताते हुए कहा कि आधा हिस्सा ताजे फलों और हरी पत्तेदार सब्जियों से भरा होना चाहिए, एक-चौथाई हिस्सा असंसाधित अनाजों या रागी और बाजरा जैसे पारंपरिक मोटे अनाजों का हो, तथा शेष एक-चौथाई हिस्सा वनस्पति प्रोटीन जैसे दालों, फलियों, बीजों, सोयाबीन और मेवों का होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में प्रचलित दाल-चावल की खिचड़ी या दाल-रोटी जैसे संयोजन शरीर को सभी आवश्यक अमीनो एसिड उपलब्ध कराते हैं। पौधों से मिलने वाला फाइबर रक्त शर्करा को नियंत्रित रखता है, हानिकारक एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को घटाता है और हृदय को स्वस्थ रखता है। डॉ. वर्मा ने शाम के समय चाय के साथ समोसे, नमकीन और बिस्कुट जैसे ट्रांस-फैट और अत्यधिक नमक युक्त तले-भुने स्नैक्स के उपभोग को मोटापे और चयापचय विकारों का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने उपभोक्ताओं से डिब्बाबंद वस्तुओं के पोषण लेबल पढ़ने और चाय के साथ अंकुरित अनाज या भुने मखाने जैसे पौष्टिक विकल्प अपनाने का आग्रह किया।
आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संयोजक उदय मन्ना ने बताया कि संस्था ने 30 सितंबर को इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के राष्ट्रीय मुख्यालय में रक्तदान जागरूकता का जो तीन महीने का संकल्प लिया था, यह सकारात्मक अभियान उसी की अगली कड़ी है। उन्होंने खाद्य पदार्थों में मिलावट और धीमे जहर के खिलाफ बीकानेर से 700 किलोमीटर की पदयात्रा कर दिल्ली में अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता दमित गहलोत के प्रयास का भी उल्लेख किया। स्वस्थ व स्वच्छ खान-पान नागरिकों का अधिकार है।
बैठक में उदय शंकर सिंह कुशवाहा, साधक
डॉक्टर ओम प्रकाश बिन्दा मन्ना ,सुनील कुमार सिंह, डॉ रश्मि चौबे ,
सुनील आर्य,निखिल पाल, आकांक्षा,लक्ष्मण प्रसाद ,राजेंद्र सिंह कुशवाहा,राजेंद्र सिंह कुशवाहा मयंक,दिनेश कुमार कुशवाहा
ने भी शाकाहारी -वीगन त्रैमासिक अभियान को प्रभावी ढंग से जमीनी स्तर पर उतारने के सुझाव दिए। आयोजकों ने बताया कि वनस्पति व प्राकृतिक आहार अंतरराष्ट्रीय अभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप देकर आगामी सप्ताह से विद्यालयों, आवासीय परिसरों और महिला मंडलों में संपर्क कार्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे।
आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया
8368626368.
Post a Comment