"आजादी के रंग, संकल्पों के संग" , आरजेएस के कार्यक्रम में कर्तव्य व संकल्प, सकारात्मक मूल्य व भाषाई अस्मिता पर हुई चर्चा.

"आजादी के रंग, संकल्पों के संग" , आरजेएस के कार्यक्रम में कर्तव्य व संकल्प, सकारात्मक मूल्य व भाषाई अस्मिता पर हुई चर्चा
16 अगस्त को आजादी पर्व अंतरराष्ट्रीय पखवाड़ा के समापन पर सायं 7 बजे अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के मुख्य अतिथि डा.संदीप मारवाह  होंगे।

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक राष्ट्रीय परिचर्चा में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2047 तक भारत को एक सक्षम और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नागरिकों द्वारा दैनिक दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन, गांधीवादी नैतिक मूल्य, भाषाई जड़ों से जुड़ाव और गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति को संरक्षित करना अनिवार्य है।
कार्यक्रम का संयोजन व संचालन आरजेएस पीबीएच -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में शामिल अतिथियों ने नागरिक कर्तव्य व संकल्प, गांधीवादी मूल्य व भाषाई अस्मिता पर प्रकाश डालते हुए क्रांतिकारी संत अरबिंदो घोष के जन्म दिवस पर कोटि कोटि नमन् किया।16 अगस्त को आजादी पर्व अंतरराष्ट्रीय पखवाड़ा के समापन पर सायं 7 बजे अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के मुख्य अतिथि डा.संदीप मारवाह  होंगे।

आरजेएस पॉजिटिव मीडिया मंच द्वारा 'आजादी के रंग और संकल्पों के संग' विषय पर आयोजित 632वें राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विदेश मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के निदेशक सुनील कुमार सिंह ने कहा कि देशभक्ति केवल प्रतीकात्मक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता और विकास की सार्थकता तभी है जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचे और उसके जीवन में सम्मानजनक बदलाव आए।

श्री सिंह ने कहा कि शिक्षक, चिकित्सक, किसान, वैज्ञानिक और प्रशासनिक कर्मी यदि अपना कार्य ईमानदारी से करें, तो यह राष्ट्र निर्माण में सबसे बड़ा योगदान है। स्वतंत्रता के बाद देश के समक्ष मौजूद भुखमरी, विस्थापन और निरक्षरता जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने लोकतांत्रिक संस्थाओं, हरित क्रांति, दुग्ध क्रांति, अंतरिक्ष मिशन और डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की है। उन्होंने यह भी साझा किया कि योग दिवस की तरह ही भारतीय खानपान और संस्कृति को वैश्विक पटल पर प्रोत्साहित करने के लिए 'अन्नपूर्णा दिवस' जैसी पहलों पर विचार किया जा रहा है।

मुख्य वक्ता गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति , नई दिल्ली के निदेशक डॉ. संजीत कुमार ने समकालीन वैश्विक तनाव और सामाजिक विषमताओं के दौर में महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के दर्शन को सर्वाधिक प्रासंगिक बताया। उन्होंने गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका में मध्यस्थता के अनुभवों, चंपारण सत्याग्रह और दांडी यात्रा के अनुशासित प्रबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि संघर्षों का स्थायी समाधान संवाद और आपसी सौहार्द से ही संभव है।

डॉ. संजीत कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता और विजय गोयल के उपाध्यक्ष पद के अंतर्गत समिति के दोनों प्रमुख केंद्र—राजघाट स्थित गांधी दर्शन और 30 जनवरी मार्ग स्थित गांधी स्मृति (बिड़ला हाउस)—गांधीवादी विचारों और नैतिक मूल्यों के प्रसार के लिए निरंतर युवाओं और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के बीच कार्यक्रमों का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इन संग्रहालयों में दांडी मार्च की ऐतिहासिक नाव और गांधी जी की अंतिम यात्रा में प्रयुक्त वाहन जैसी मूल स्मृतियां संरक्षित हैं, जिनका अवलोकन आम जनता निशुल्क कर सकती है। यह संस्थान प्रत्येक सोमवार को बंद रहता है।

विशिष्ट अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाठक ने युवाओं में अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक जड़ों से बढ़ती दूरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विकास की परिभाषा केवल आर्थिक संपन्नता तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि मानवीय संवेदना, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा इसका मूल आधार होना चाहिए। उन्होंने शिक्षण के माध्यम से छात्रों को अपनी भाषा, लोक-परंपराओं और राष्ट्रीय दायित्वों से जोड़ने का संकल्प दोहराया।

अतिथि वक्ता उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जनपद स्थित बेवर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले शहीद मेले के संयोजक व लेखक राज त्रिपाठी ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन केवल प्रमुख शहरों तक सीमित नहीं था, बल्कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के जनसामान्य की सामूहिक चेतना ने इसे शक्ति प्रदान की। उन्होंने 15 अगस्त 1942 को बेवर थाने पर तिरंगा फहराने के दौरान शहीद हुए 14 वर्षीय छात्र कृष्ण कुमार, जमुना प्रसाद त्रिपाठी और सीताराम गुप्त के बलिदान को याद किया। उन्होंने बताया कि 1972 से लगातार 54 वर्षों से बेवर में शहीदों की स्मृति में मेला आयोजित किया जा रहा है। श्री त्रिपाठी ने संविधान के अनुच्छेद 51(क) के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करने और नागरिक कर्तव्यों के पालन पर बल दिया।
कार्यक्रम के संयोजक उदय मन्ना ने बताया कि 15 दिवसीय स्वाधीनता पखवाड़े के तहत सकारात्मक पत्रकारिता के माध्यम से इतिहास और समाज-निर्माण के संकल्पों का आठवीं पुस्तक के लिए दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। डा मुन्नी कुमारी ने 16 अगस्त के आजादी पर्व अंतरराष्ट्रीय पखवाड़ा के समापन वेबिनार में जुड़ने का आग्रह किया।
उन्होंने आगामी संभावित तिथि 30 सितंबर को नई दिल्ली स्थित रेड क्रॉस मुख्यालय में स्वैच्छिक रक्तदान जागरूकता को लेकर मीडिया सम्मेलन आयोजित करने की योजना की घोषणा की। वेबिनार में दूरदर्शन कर्मी इसहाक खान ने सोनभद्र (दुद्धी) के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों और ग्रामीण कलाकारों को मंच देने, डॉ. मुन्नी कुमारी ने सांस्कृतिक निरंतरता बनाए रखने तथा साधक डॉ. ओमप्रकाश झुनझुनवाला ने लोक कल्याण के संकल्प व्यक्त किए। आरजेएस पाॅजिटिव ब्रांच नोएडा के मानद प्रभारी उदय शंकर सिंह कुशवाहा ने अपनी नातिन मानुषी के जन्मदिन 30‌अगस्त 2026 को कार्यक्रम का संकल्प लिए। स्वीटी पाॅल का संकल्प सकारात्मक आंदोलन के साथ कार्यक्रम को-होस्ट करना वहीं नीति अरोड़ा आरजेएस व रेडक्रास के स्वैच्छिक रक्तदान जागरूकता संकल्प से जुड़ गई हैं।

आकांक्षा मन्ना 
हेड‌ क्रिएटिव टीम 
आरजेएस पीबीएच 
9811705015.
www.rjspbh.com
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