आरजेएस पीबीएच ने इंस्पायरिंग इंडियन वूमेन,यूके & भारत के सहयोग से जेन जेड और जेन अल्फा डायस्पोरा को भारतीय विरासत व सेनानियों के इतिहास से जोड़ा.

आरजेएस पीबीएच ने इंस्पायरिंग इंडियन वूमेन,यूके & भारत के सहयोग से  जेन जेड और जेन अल्फा डायस्पोरा को भारतीय विरासत व सेनानियों के इतिहास से जोड़ा.


80वें आजादी पर्व अंतरराष्ट्रीय पखवाड़ा में आरजेएस पाॅजिटिव ब्रांच, नोएडा पांच अगस्त को "प्रेमचंद की कलम और शहीदों की स्याही" कार्यक्रम को-ऑरगेनाइज करेगा.

नई दिल्ली --  80वें आजादी पर्व अंतरराष्ट्रीय पखवाड़ा के चौथे दिन युवाओं के सांस्कृतिक अलगाव और पश्चिमी जीवन शैली के बढ़ते प्रभाव पर चिंताओं के बीच, पीढ़ीगत और भौगोलिक अंतर को पाटने के लिए राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) द्वारा  इंस्पायरिंग इंडियन विमेन, यूनाइटेड किंगडम व भारत की संस्थापक निदेशक रश्मि मिश्रा के सहयोग से एक अंतरराष्ट्रीय संवाद आयोजित किया गया। आरजेएस पीबीएच के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने बताया कि केंद्रीय एजेंडा जनरेशन जेड और जनरेशन अल्फा को पारंपरिक भारतीय मूल्यों से जोड़ने,सकारात्मक मीडिया को बढ़ावा देने और भारत के सबसे कम उम्र के स्वतंत्रता सेनानियों की भूली हुई विरासतों को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित था। इसमें बारह खुदीराम बोस,वर्षीय बाजी राउत, प्रीति लता वाडेदार और हेमू हेमू कालानी की वीर गाथा सुनाई गई। उन्होंने कहा कि पांच अगस्त को उदय शंकर सिंह कुशवाहा, नौ अगस्त को स्वीटी पाॅल और सोलह अगस्त को डा. मुन्नी कुमारी आजादी पर्व पखवाड़े का कार्यक्रम को-ऑरगेनाइज करेंगी।  मुख्य अतिथि ब्रह्माकुमारी महिपालपुर शाखा की निदेशक बीके अनुसूया, मुख्य वक्ता राजभाषा और समाचार सेवा प्रभाग आकाशवाणी की पूर्व सहायक निदेशक ललिता जोशी ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।

आईआईडब्ल्यू की संस्थापिका एवं निदेशिका रश्मि मिश्रा ने RJS की तकनीकी टीम की सहायता से श्रीमती नित्या सौम्या, संस्थापिका - साईस्वरालया UK की छात्राओं के कुछ वीडियो क्लिप प्रस्तुत किए।  जिसमें सिद्धार्थ शिवरात्रि के अवसर पर शिव भजन गाते हुए दिखाई दिए।  उनकी छात्राएं स्लॉफ तमिल संघम में पोंगल उत्सव पर गायन करती हुईं‌  तथा लोक्या और युव श्रीराम नवमी पर गायन करते हुए दिखाई दिए।

कार्यक्रम में सनातन शक्तिन के नीलेश जोशी,लंदन, स्कॉटलैंड में ब्रिटिश यूथ इंटरनेशनल कॉलेज की निदेशक डॉ. रश्मि मंत्री, ग्लास्गो से काव्या वुसीकला , प्रतिनिधि इंद्रप्रस्थ किड्स एकेडमी, सोनिया सिंगला इंडिपेंडेंट रिसर्चर, श्री कुमार एटी,नीलांजला, इशहाक खान,आरएस कुशवाहा,रति चौबे, निशा चतुर्वेदी,मानुषी, आकांक्षा, मयंक राज और राजेश रेकवाल आदि शामिल हुए।

मुख्य अतिथि ब्रह्माकुमारी महिपालपुर शाखा की निदेशक बीके अनुसूया ने दैनिक जीवन में आध्यात्मिकता के मजबूत एकीकरण की वकालत की। उन्होंने मोबाइल की लत से निपटने के लिए एक सख्त नियम का प्रस्ताव रखा। इंस्पायरिंग इंडियन विमेन की संस्थापक निदेशक रश्मि मिश्रा ने डायस्पोरा माता-पिता की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया : माता-पिता यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनके बच्चे सम्मानजनक रहें और अपनी जड़ों से जुड़े रहें ?बीके अनुसूया ने कहा  कि शिक्षा दी नहीं जाती, बल्कि ग्रहण की जाती है। उन्होंने यह बताने के लिए किस्से सुनाए कि माता-पिता जो उपदेश देते हैं, यदि वे स्वयं उसका पालन नहीं करते हैं, तो बच्चे नहीं सीखेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि बदलाव की शुरुआत स्वयं से होनी चाहिए।

 राजभाषा और समाचार सेवा प्रभाग आकाशवाणी की पूर्व सहायक निदेशक ललिता जोशी ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी के शुरुआती आंदोलनों, कैलिफोर्निया में लाला हरदयाल की गदर पार्टी और लंदन में श्यामजी कृष्ण वर्मा के इंडिया हाउस से शुरू हुआ, जो क्रांतिकारी छात्रों के लिए एक केंद्र के रूप में कार्य करता था। 

ललिता जोशी ने युवाओं के बीच हिंदी और क्षेत्रीय साहित्य में घटती रुचि पर गहरी चिंता व्यक्त की, जिसका श्रेय उन्होंने मातृभाषा से दूरी की एक ऐसी शिक्षा प्रणाली और माता-पिता की मानसिकता को दिया जो करियर में उन्नति के लिए अंग्रेजी की ओर अत्यधिक झुकी हुई है। ललिता जोशी ने टिप्पणी की कि बच्चों के साथ तेजी से कार्यालय की फाइलों की तरह व्यवहार किया जा रहा है, जिससे मानवीय सहानुभूति की भारी कमी हो रही है। मोबाइल सामग्री के अनियंत्रित उपभोग से यह सांस्कृतिक क्षरण और बढ़ गया है। रील संस्कृति, जो शॉर्टकट मानसिकता और त्वरित संतुष्टि को बढ़ावा देती है, को आज के युवाओं के बीच अवसाद और अनुचित भाषा के उपयोग के प्राथमिक चालक के रूप में पहचाना गया। यह कार्यक्रम जेन जी से नकारात्मक सामग्री से दूर रहने और सकारात्मक मीडिया के माध्यम से स्थायी विरासत बनाने के आह्वान के साथ, यह सुनिश्चित करते हुए समाप्त हुआ कि भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को वैश्विक डायस्पोरा द्वारा कभी नहीं भुलाया जाएगा।

इस कार्यक्रम ने युवाओं को अपने अनुभव व्यक्त करने के लिए एक मंच भी प्रदान किया ।

संस्थापिका एवं निदेशिका रश्मि मिश्रा ने RJS की तकनीकी टीम की सहायता से श्रीमती नित्या सौम्या, संस्थापिका - साईस्वरालया UK की छात्राओं के कुछ वीडियो क्लिप प्रस्तुत किए।  जिसमें सिद्धार्थ शिवरात्रि के अवसर पर शिव भजन गाते हुए दिखाई दिए।  उनकी छात्राएं स्लॉफ तमिल संघम में पोंगल उत्सव पर गायन करती हुईं।  

तथा लोक्या और युव श्रीराम नवमी पर गायन करते हुए मंच की शोभा बढ़ाए। स्कॉटलैंड में ब्रिटिश यूथ इंटरनेशनल कॉलेज की निदेशक डॉ. रश्मि मंत्री ने युवा दिमागों पर पुरानी विचारधाराओं को थोपने के बजाय पीढ़ी के अंतर को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस भावना को एडिनबर्ग विश्वविद्यालय की अंतिम वर्ष की छात्रा काव्या वुसिकला ने व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित किया। ग्लासगो में पले-बढ़े होने की अपनी यात्रा पर बोलते हुए, काव्या ने भरतनाट्यम के प्रति अपने पंद्रह साल के समर्पण और कर्नाटक संगीत में दस साल के प्रशिक्षण का विवरण दिया। विश्वविद्यालय की इंडियन डांस सोसाइटी जुनून और हिंदू सोसाइटी की अध्यक्ष के रूप में, वह सक्रिय रूप से सांस्कृतिक और सेवा कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं। जब उदय कुमार मन्ना ने उनकी सांस्कृतिक जड़ों के स्रोत के बारे में सवाल किया, तो काव्या ने अपनी माँ को अपनी प्राथमिक प्रेरणा का श्रेय दिया, जिससे यह आवर्ती विषय मजबूत हुआ कि माँ बच्चे के जीवन में पहली और सबसे महत्वपूर्ण शिक्षिका होती है।


इस सांस्कृतिक गति को बनाए रखने के लिए आगामी पहलों के संबंध में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। आरजेएस पीबीएच नोएडा शाखा के मानद प्रभारी उदय शंकर सिंह ने साहित्यिक प्रतीक मुंशी प्रेमचंद की विरासत को याद करने के लिए पांच अगस्त को निर्धारित एक विशेष संगोष्ठी की घोषणा की। इस संगोष्ठी में प्रोफेसर दर्शन पांडे और डॉ. हरि सिंह पाल जैसे प्रमुख विद्वान शामिल होंगे, जिसका उद्देश्य प्रेमचंद के राष्ट्रवादी साहित्य में रुचि को पुनर्जीवित करना है। इसके अतिरिक्त, सात अगस्त को नोएडा के दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन सभागार में एक प्रमुख भौतिक कार्यक्रम होने वाला है। इस आयोजन के दौरान, तीन सौ उपस्थित लोगों के दर्शकों के सामने सकारात्मक मीडिया आंदोलन का दस्तावेजीकरण करने वाली एक व्यापक दो सौ पृष्ठों की पुस्तक लॉन्च की जाएगी। इसके अलावा, भारत मंडपम की पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक स्वीटी पॉल ने भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ के अवसर पर नौ अगस्त को एक समर्पित कार्यक्रम की घोषणा की। यह सत्र विशेष रूप से महिला स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करेगा और महिला सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो राष्ट्र और परिवार दोनों को आकार देने में महिलाओं की अपरिहार्य भूमिका को सुदृढ़ करेगा।

एंकर उदय कुमार मन्ना ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के किशोर और बाल शहीदों को श्रद्धांजलि देकर कार्यवाही शुरू की। कम उम्र में अपने प्राणों की आहुति देने वाली हस्तियों पर प्रकाश डालते हुए, उदय कुमार मन्ना ने ओडिशा के बारह वर्षीय बाजी राउत की बहादुरी को याद किया, जिन्हें ग्यारह अक्टूबर, उन्नीस सौ अड़तीस को ब्रिटिश पुलिस ने नदी पार कराने से मना करने पर मार दिया था। यह श्रद्धांजलि बंगाल की पहली महिला शहीद तक भी गई, जिन्होंने क्रांतिकारी सूर्य सेन के साथ काम करने के बाद इक्कीस साल की उम्र में अपने प्राणों की आहुति दे दी, साथ ही अठारह साल की उम्र में फांसी पर चढ़ाए गए खुदीराम बोस और सिंध के उन्नीस वर्षीय क्रांतिकारी हेमू कालानी, जिन्हें उन्नीस सौ तैंतालीस में हथियारों से भरी ब्रिटिश ट्रेन को पटरी से उतारने के प्रयास के लिए फांसी दी गई थी। इस आख्यान ने पारंपरिक ऐतिहासिक ढांचे को चुनौती दी। सनातन शक्तिन के नीलेश जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्रता संग्राम केवल गांधी और नेहरू के नेतृत्व वाले अहिंसक आंदोलनों के माध्यम से नहीं जीता गया था, बल्कि चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे सशस्त्र क्रांतिकारियों के सर्वोच्च बलिदान पर भी बहुत अधिक निर्भर था।

व्यापक सत्र एक वैश्विक एकीकरण के उपकरण के रूप में सकारात्मक प्रसारण का उपयोग जारी रखने के सामूहिक संकल्प के साथ संपन्न हुआ। इन बौद्धिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदानों का दस्तावेजीकरण करके, आरजेएस पीबीएच राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस का उद्देश्य भविष्य के शोध के लिए सकारात्मक सोच का एक स्थायी भंडार बनाना है। आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक दुनिया की तेजी से तकनीकी प्रगति के अनुकूल होना आवश्यक है, लेकिन यह राष्ट्र प्रथम और वसुधैव कुटुंबकम के मौलिक भारतीय लोकाचार की कीमत पर नहीं होना चाहिए। 


आकांक्षा मन्ना 

आरजेएस पीबीएच -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया 

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