आरजेएस वेबिनार में जेन जी और जेन अल्फा के समग्र विकास , संस्कार, अनुशासन और व्यावहारिक शिक्षा पर विशेषज्ञों का जोर रहा
उदय शंकर सिंह कुशवाहा की नातिन मानुषी के पांचवें जन्मदिन पर आरजेएस ने जागरूकता कार्यक्रम किया
31 अगस्त को आरजेएस पीबीएच पाॅजिटिव मीडिया न्यूज लेटर का लोकार्पण और राष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर चर्चा करेगा.
आरजेएस युवा टोली, पटना सितंबर में सात विडियो संदेश वहीं टीआरडी27की स्वीटी पाॅल व नीति अरोड़ा 29 सितंबर को कार्यक्रम को-होस्ट करेंगी।
नई दिल्ली
बदलते सामाजिक परिवेश में नई पीढ़ी यानी जेन जी और जेन अल्फा को सही दिशा देने के लिए परिवारों में संवाद, शिक्षण संस्थानों में संस्कार आधारित अनुशासन और रोजगारोन्मुखी व्यावहारिक शिक्षा का समावेश बेहद जरूरी है। सकारात्मक पत्रकारिता को समर्पित मंच आरजेएस पीबीएच - आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने 30 अगस्त को 639वें राष्ट्रीय वेबिनार का संयोजन व संचालन किया। उन्होंने 1 से 7 सितंबर तक मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पोषण सप्ताह और आरजेएस युवा टोली द्वारा जारी किए जाने वाले जीवन निर्माण वीडियो संदेशों की रूपरेखा भी साझा की। टीआरडी27 की सदस्या नीति अरोड़ा ने 29 सितंबर 2026 विश्व हृदय दिवस का कार्यक्रम स्वीटी पाॅल के साथ को-होस्ट करने की घोषणा की।
आरजेएस पॉजिटिव ब्रांच नोएडा के मानद प्रभारी उदय शंकर सिंह कुशवाहा की नातिन मानुषी के 30 अगस्त पांचवें जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष परिचर्चा का मुख्य विषय युवाओं के सकारात्मक मूल्यों का विश्लेषण और स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निर्माण रहा। श्री कुशवाहा ने अतिथियों का स्वागत और धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर मानुषी ने केक काटा और सभी ने उसे ढेर सारी बधाइयां दीं। वेबिनार में
मानुषी के देशभक्ति नृत्य की विडियो प्रस्तुत की गई।
मुख्य अतिथि के रूप में शांतिकुंज हरिद्वार के विदेश विभाग समन्वयक प्रो. प्रमोद भटनागर ने कहा कि बच्चे उपदेशों से नहीं, बल्कि बड़ों के आचरण से सीखते हैं। उन्होंने बच्चों के चरित्र निर्माण के लिए पांच बुनियादी सिद्धांतों पंचशील का उल्लेख किया, जिनमें मधुर व्यवहार, परिश्रमशीलता, मितव्ययिता, परस्पर सहयोग और सुव्यवस्था शामिल हैं। प्रो. भटनागर ने रेखांकित किया कि बाहरी चमक-दमक के बजाय आंतरिक गुणों और दृष्टिकोण को परिष्कृत करना आवश्यक है। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकार हर नागरिक को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती, इसलिए युवाओं को उच्च शिक्षा के साथ-साथ लघु उद्योगों और आत्मनिर्भर बनाने वाले कौशलों की ओर उन्मुख होना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि और ब्रह्माकुमारीज की आध्यात्मिक प्रशिक्षक बीके मेधा बहन ने विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव पर चिंता व्यक्त की। अल्बर्ट आइंस्टीन के विचारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञान साधन और सूचना उपलब्ध कराता है, जबकि आध्यात्मिकता उसे सही दिशा देती है। उन्होंने पतंग का दृष्टांत देते हुए समझाया कि मर्यादा और सांस्कृतिक मूल्य उस डोर की तरह हैं जो स्वतंत्रता को सार्थक बनाए रखते हैं। उन्होंने अभिभावकों को चेताया कि वे अपनी अधूरी इच्छाओं का बोझ बच्चों पर न लादें और घरेलू माहौल को सकारात्मक बनाए रखें ताकि बच्चे अवसाद और भय से मुक्त रह सकें।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव और दिल्ली मेडिकल काउंसिल के उपाध्यक्ष डॉ. नरेश चावला ने पीढ़ियों के सामाजिक बदलाव का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवारों के दौर से एकल परिवारों और इंटरनेट युग में पहुंचे बच्चों को सुख-सुविधाएं तो मिल रही हैं, लेकिन पारिवारिक समय और भावनात्मक समर्थन का अभाव महसूस हो रहा है। डॉ. चावला ने खेल और कला जगत के दिग्गजों का उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चों की स्वाभाविक रुचि को पहचाना जाना चाहिए। उन्होंने जापान की प्राथमिक शिक्षा प्रणाली का हवाला देते हुए बताया कि वहां बच्चों को औपचारिक पढ़ाई से पहले स्वच्छता, शिष्टाचार और नागरिक अनुशासन सिखाया जाता है। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों पर दबाव बनाने के बजाय उनके साथ मित्रवत संवाद स्थापित करने की सलाह दी।
सत्र के दौरान प्रतिभागी स्वीटी पॉल और नीति अरोड़ा ने प्राथमिक विद्यालयों में सकारात्मक दृष्टिकोण के पाठ्यक्रम और सामाजिक माध्यमों के नकारात्मक प्रभावों से बचाव को लेकर सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में राकेश मौर्य ,दिनेश कुमार कुशवाहा ,बृजानंद प्रसाद ,पवन कुमार , मयंक सुषमा शर्मा, तन्मय पाण्डया,सरिता कपूर ,धर्मेंद्र कुमार ,संदीप साहू अमृता घई , डॉ मुन्नी कुमारी, आकांक्षा और महाराज सिंह आदि शामिल हुए।
कार्यक्रम में राजेंद्र सिंह कुशवाहा, स्वीटी सहित अनेक प्रबुद्धजनों ने विचार रखे और युवा पीढ़ी को भटकाव से बचाकर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाने के संकल्प के साथ संगोष्ठी संपन्न हुई।
आरजेएस के राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने संगठन की ग्यारह वर्षों की विकास यात्रा और वर्ष 2047 तक चलने वाले सकारात्मक भारत दस्तावेजीकरण अभियान की जानकारी दी।
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