आरजेएस कार्यक्रम में महिला समानता ,ईद मिलाद-उन-नबी और ओणम पर महिला अधिकार और कर्तव्य पर हुआ संवाद

आरजेएस कार्यक्रम में महिला समानता ,ईद मिलाद-उन-नबी और ओणम पर महिला अधिकार और कर्तव्य पर हुआ संवाद  

 आरजेएस पॉजिटिव मीडिया का राष्ट्रीय कार्यक्रम: महिला समानता की शुरुआत घर और सकारात्मक सोच से होना जरूरी
आरजेएस कार्यक्रम में बीके शिवांगी बहन ने मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए संक्षिप्त ध्यान अभ्यास कराया ।
नई दिल्ली
लैंगिक समानता केवल कानूनी प्रावधानों और नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी वास्तविक शुरुआत परिवार के भीतर समान परवरिश, घरेलू कार्यों के साझा बंटवारे और आंतरिक आत्मसम्मान से होनी चाहिए। RJS POSITIVE MEDIA YT LIVE BROADCAST -WEBINAR  LINK https://www.youtube.com/live/OaJwUXhxBjA?si=K6L4MUmT8hmlD4xW
आरजेएस पीबीएच -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया आंदोलन के तहत भारत मंडपम,नई दिल्ली की उप प्रबंधक (सेवा निवृत्त)अमृता घई द्वारा 26 मई 2026 को सह-आयोजित यह 636वां वेबिनार महिलाओं के अधिकार, समानता और पारिवारिक जिम्मेदारियों के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित था। अतिथियों में बीके शिवांगी, शहला निगार और जयति ओझा ने अधिकारों की बातचीत के साथ कर्तव्यों के निर्वहन पर भी समान रूप से ध्यान दिलाया। प्रतिभागियों में उदय शंकर सिंह कुशवाहा, स्वीटी पाॅल, सरिता कपूर,राजेन्द्र सिंह कुशवाहा, राकेश मौर्य,बृजानंद प्रसाद, डा.मुन्नी कुमारी ,नीति अरोड़ा,आकांक्षा, मयंक और बिन्दा मन्ना आदि शामिल रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए संस्था के संस्थापक व संयोजक उदय कुमार मन्ना ने कहा कि महिला समानता दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने पैगम्बर ए इस्लाम हज़रत मुहम्मद के जन्मदिन,मदर टेरेसा की जयंती और देश के ओणम जैसे विभिन्न सांस्कृतिक पर्वों का स्मरण करते हुए कहा कि कहा कि 1920 में 26 अगस्त को अमेरिकी संविधान संशोधन के साथ महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला,जिसे 1971 में महिला समानता दिवस के रूप में मान्यता मिली।
भारत व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ), भारत मंडपम की सेवानिवृत्त उप प्रबंधक अमृता घई ने अपने व्यक्तिगत जीवन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अपनी बेटी को आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधी आबादी के सशक्तिकरण के बिना कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने परिवारों से अपील की कि वे बेटियों की शिक्षा और करियर को बेटों के समान प्राथमिकता दें।
कार्यक्रम में माउंट आबू, राजस्थान से मुख्य अतिथि के रूप में जुड़ीं ब्रह्माकुमारीज संस्थान, आबू राज की प्रेरक वक्ता बीके शिवांगी बहन ने सशक्तिकरण के आध्यात्मिक और मानसिक पहलुओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समानता की नींव व्यक्ति की अपनी सोच और आत्मसम्मान पर टिकी होती है। जब महिलाएं स्वयं को दुर्बल मानने के बजाय अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानती हैं, तब उनके दृष्टिकोण और आचरण में सकारात्मक बदलाव आता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दूसरों से अधिकार और सम्मान मांगने के बजाय अपनी क्षमताओं को सुदृढ़ बनाकर सकारात्मक योगदान देने वाला बनना चाहिए। सत्र के दौरान उन्होंने प्रतिभागियों को मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए संक्षिप्त ध्यान अभ्यास भी कराया।

दूरदर्शन (डीडी न्यूज) की वरिष्ठ पत्रकार और एंकर शहला निगार ने समानता के व्यावहारिक और पारिवारिक अनुभवों को साझा किया। अपने परिवार का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनके घर में भाई-बहनों के बीच कार्यों का कोई भेदभाव नहीं था और नाम में भी माता-पिता दोनों की पहचान को स्थान दिया गया। 

अधिवक्ता एवं लेखिका डॉ. जयती ओझा ने कहा कि स्त्री और पुरुष का संबंध किसी प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि आपसी तालमेल और संतुलन का है। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता के विकास में दोनों की भूमिका पहियों के समान रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि महिलाएं आज सीमाओं की रक्षा से लेकर हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध कर रही हैं। उनके अनुसार, अधिकारों की चेतना के साथ-साथ मर्यादा और परस्पर सम्मान का भाव बना रहना चाहिए ताकि सामाजिक ताना-बाना मजबूत रहे।

शहला निगार ने कहा कि भेदभाव की शुरुआत अक्सर घर से होती है, जब लड़कों को विशेष सुविधाएं दी जाती हैं और लड़कियों को दोयम समझा जाता है। निगार ने संपत्ति में महिलाओं के कानूनी अधिकारों के बावजूद सामाजिक संकोच और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की निर्बाध आवाजाही को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समानता तभी सार्थक होगी जब समाज सड़कों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की मौजूदगी को बिना किसी समय-सीमा के सहज रूप से स्वीकार करेगा।

वेबिनार में भाग लेते हुए स्वीटी पॉल ने कामकाजी महिलाओं के प्रति पारिवारिक प्रोत्साहन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में संस्कारों के निर्माण के लिए बच्चों को समय और मार्गदर्शन देना अत्यंत आवश्यक है। वहीं सरिता कपूर ने रक्षाबंधन पर्व के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए कहा कि आधुनिकता और अधिकारों के साथ पारिवारिक मर्यादाओं और कर्तव्यों का पालन भी जरूरी है। कारगिल युद्ध से जुड़े रहे पूर्व सैनिक बृजानंद प्रसाद ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों के प्रति स्थानीय समाज के सम्मान और रक्षाबंधन के अनुभवों को साझा किया। युवा प्रतिभागी नीति अरोड़ा ने परिवार में बेटी और बहू के प्रति दृष्टिकोण में आने वाले अंतर की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए समानता को पारिवारिक व्यवहार में पूरी तरह उतारने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में उदय मन्ना ने आगामी आयोजनों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 30 अगस्त को युवा पीढ़ी और बच्चों के सकारात्मक मूल्यों पर केंद्रित आरजेएस का 339 वां विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें शांतिकुंज हरिद्वार के प्रोफेसर प्रमोद भटनागर, ब्रह्मा कुमारीज संस्थान दक्षिण दिल्ली की बीके मेधा बहन और अधिवक्ता मोनिका जैन शामिल होंगी। 
इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (1-7 सितंबर)की पूर्व संध्या पर आरजेएस का 640वां कार्यक्रम 31 अगस्त 2026 को आरजेएस के राष्ट्रीय ऑब्जर्वर दीप माथुर की अगुवाई में संगठन का मासिक न्यूजलेटर "पाॅजिटिव मीडिया"  जारी किया जाएगा।
This is the most recent post.
Older Post

Post a Comment

[blogger][facebook][disqus][spotim]

Author Name

RJS-PBH

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.