विश्व पर्यटन दिवस2026 : पर्यटन में एआई से बढ़ेंगी सुविधाएं, लेकिन मानवीय संवेदना और सतर्कता जरूरी: विशेषज्ञ पाॅजिटिव मीडिया वेबिनार

पर्यटन में एआई से बढ़ेंगी सुविधाएं, लेकिन मानवीय संवेदना और सतर्कता जरूरी: विशेषज्ञ आरजेएस वेबिनार

नई दिल्ली

पर्यटन क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग से यात्रा की योजना बनाना, टिकटिंग और सीमा प्रबंधन भले ही पहले से अधिक सुगम हो गया हो, लेकिन यह तकनीक आतिथ्य सत्कार की मानवीय संवेदना का विकल्प नहीं बन सकती। इसके साथ ही डिजिटल फर्जीवाड़े और साइबर अपराधों के बढ़ते खतरों को देखते हुए यात्रियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के मानद को-होस्ट व मुख्य वक्ता तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के पूर्व निदेशक व राजनयिक सुनील कुमार सिंह ने कहा कि यूपीआई, स्मार्ट सेंसर और सोशल मीडिया प्रचार ने भारत में पर्यटन को नया विस्तार दिया है। उन्होंने अपने गुयाना और मॉरीशस के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय प्रवासियों और विदेशी नागरिकों में भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्रों के प्रति गहरा आकर्षण है। उन्होंने विदेश यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटकों को सुझाव दिया कि वे केवल इंटरनेट की जानकारी पर निर्भर न रहें, बल्कि जाने से पहले विवरणों की दोबारा पुष्टि करें और संकट की स्थिति के लिए संबंधित देशों में स्थित भारतीय दूतावासों के संपर्क सूत्र हमेशा अपने पास रखें।
विश्व पर्यटन दिवस(27 सितंबर )की पूर्व संध्या पर 25 सितंबर को आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय मन्ना द्वारा 655वें राष्ट्रीय कार्यक्रम में नागरिक उड्डयन, विदेश मंत्रालय और पर्यटन क्षेत्र के वरिष्ठ पूर्व अधिकारियों तथा तकनीकी विशेषज्ञों ने पर्यटन के नए डिजिटल परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य अतिथि स्टिक ट्रैवल्स ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. सुभाष गोयल ने मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कई लाभ हैं, लेकिन इस पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। आज फर्जी वेबसाइटों, टिकटों में धोखाधड़ी और वॉइस क्लोनिंग के जरिए करोड़ों की ठगी हो रही है। उन्होंने कोरोना महामारी के दौर का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह कई ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टलों पर ऑटोमेटेड चैटबॉट के कारण हजारों यात्री अपनी उड़ानें रद्द होने पर धन वापसी के लिए भटकते रह गए।

डॉ. गोयल ने कहा कि मशीनें सूचनाएं दे सकती हैं, लेकिन वे उस आत्मीय मुस्कान और अतिथि देवो भव: की मानवीय भावना की जगह नहीं ले सकतीं जो भारतीय पर्यटन की मूल पहचान है। उन्होंने महामारी के बाद पर्यटन क्षेत्र की वापसी का जिक्र करते हुए कहा कि बिना किसी सीधी वित्तीय सहायता के भी यह उद्योग यात्रियों की बदली सोच और संचित पूंजी के आधार पर तेजी से संभला है। साथ ही टीसीएस के सहयोग से पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया डिजिटल होने से आम लोगों को बड़ी राहत मिली है।
विशिष्ट अतिथि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के पूर्व महाप्रबंधक और एयर ट्रैवलर्स एसोसिएशन के महासचिव जी. एस. बावा ने पर्यटन व्यवस्था को पुनर्गठित करने के लिए चार प्रमुख आधार प्रस्तुत किए, जिनमें सुगम पहुंच, गंतव्य प्रबंधन, छोटे व्यवसायों का कौशल विकास और लक्षित प्रचार शामिल हैं।

बावा ने कहा कि ई-वीजा, चिप वाले पासपोर्ट, डीजी यात्रा और रियल टाइम बहुभाषी अनुवाद से अंतरराष्ट्रीय व घरेलू आवागमन बेहद सहज हो गया है। इसके अलावा माता वैष्णो देवी जैसे संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर वास्तविक समय में भीड़ नियंत्रण और डायनेमिक टिकटिंग के जरिए हादसों को रोका जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि होमस्टे और छोटे स्थानीय व्यवसायी पर्यटन की रीढ़ हैं, जिन्हें सिंगल विंडो क्लीयरेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ाने में नहीं, बल्कि बेहतर और संतुलित पर्यटन में निहित है।

विशिष्ट अतिथि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में वरिष्ठ आईटी सलाहकार और पूर्व सरकारी आईटी अधिकारी निखिलेश मिश्रा ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस तरह सामूहिक पैकेज पर्यटन को व्यक्तिगत प्राथमिकताओं में बदल रही है। कोई भी पर्यटक अपने बजट, अवधि, स्थानीय खानपान, इतिहास या प्राकृतिक रुचि के आधार पर कुछ ही पलों में अनुकूलित योजना प्राप्त कर सकता है।

मिश्रा के अनुसार, ऐतिहासिक स्मारकों पर एआई आधारित डिजिटल टूर गाइड विभिन्न भाषाओं में बच्चों और बड़ों को उनकी समझ के अनुसार इतिहास समझा सकते हैं। इससे देश के छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों और स्थानीय हस्तशिल्प केंद्रों को वैश्विक मानचित्र पर लाने में मदद मिलेगी, जिससे वहां रोजगार के नए अवसर बनेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक सिर्फ एक माध्यम है और पर्यटन का वास्तविक स्वरूप इसे उपयोग करने वालों के दृष्टिकोण पर निर्भर करेगा।

अतिथि वक्ता पर्यटन मंत्रालय के पूर्व सहायक निदेशक मृत्युंजय मिश्रा ने जमीनी बुनियादी ढांचे के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आधुनिक डिजिटल मीडिया तभी प्रभावी होगा जब भौतिक सुविधाएं, स्वच्छता और सुरक्षा चाक-चौबंद हों। पर्यटन का विकास केवल सरकार का नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है।

संवाद सत्र के दौरान आईटीपीओ, भारत मंडपम की पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक स्वीटी पॉल ने ऑनलाइन यात्रा बुकिंग में होने वाले फर्जीवाड़े और उससे बचाव के उपायों पर सवाल उठाया। इसके उत्तर में डॉ. गोयल ने सुझाव दिया कि यात्रियों को सोशल मीडिया के लुभावने विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय पर्यटन मंत्रालय और मान्यता प्राप्त ट्रैवल एजेंट संघों से जुड़े आधिकारिक ऑपरेटरों के माध्यम से ही बुकिंग की पुष्टि करनी चाहिए।

एक अन्य प्रतिभागी नीति अरोड़ा द्वारा एआई से पर्यावरण, रोजगार और मानवीय संबंधों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर पूछे गए सवाल पर जी. एस. बावा ने कहा कि सरकार के शीर्ष स्तर पर इस बात पर गंभीर विमर्श चल रहा है कि तकनीक के दुरुपयोग को कैसे नियंत्रित किया जाए ताकि संतुलित विकास संभव हो सके। मृत्युंजय मिश्रा ने जोड़ा कि भाषा चाहे कितनी भी उन्नत हो जाए, वह मानवीय भावनाओं का स्थान कभी नहीं ले सकती।

आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक उदय मन्ना ने परिचर्चा का संयोजन करते हुए कहा कि इस वैचारिक मंथन का डिजिटल और प्रिंट प्रलेखन किया जा रहा है, जो आगामी जनवरी 2027 में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पखवाड़े की रूपरेखा को मजबूती देगा।

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