पितृपक्ष पर पूर्वजों के स्मरण और मानवीय संवेदना पर आरजेएस गोष्ठी, लावारिस अस्थियों के विसर्जन का प्रेरक संकल्प प्रस्तुत.
पितृपक्ष श्राद्ध पूर्णिमा पर आरजेएस के प्रेरणास्रोत उदय मन्ना के माता-पिता और सास-ससुर की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित हुआ
नई दिल्ली.
पितृपक्ष के पावन अवसर पर पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, आध्यात्मिक चेतना और मानवीय उत्तरदायित्व के महत्व को रेखांकित करते हुए आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना द्बारा 656वें राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन उदय मन्ना ने अपने माता-पिता स्व० जनकदुलारी देवी-रामजग सिंह और सास-ससुर स्व० बिमला देवी -जगबली सिंह की स्मृति में आयोजित किया ।
आरजेएस युवा टोली पटना के साधक डा ओमप्रकाश ने अपने ओपनिंग रिमार्क्स में छब्बीस सितंबर से शुरू होकर दस अक्टूबर तक चलने वाले इस सोलह दिवसीय पक्ष के संदर्भ में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और श्री देवोत्थान सेवा समिति के राष्ट्रीय महामंत्री तथा समाचार संपादक विजय शर्मा ने लावारिस अस्थियों के वैदिक रीति से विसर्जन की अपनी पच्चीस वर्षों की सेवा यात्रा का ब्योरा साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था ने अब तक देश के विभिन्न श्मशान घाटों से लावारिस और अज्ञात व्यक्तियों की एक लाख उनहत्तर हजार आठ सौ अठारह अस्थियों को एकत्र कर हरिद्वार के कनखल स्थित सती घाट पर गंगा में विधिवत विसर्जित किया है। इसके अलावा समिति पाकिस्तान से भी तीन बार अस्थियां लेकर भारत आई, जिनमें वर्ष 2011 में 135, वर्ष 2016 में 160 और फरवरी 2025 में 400 अस्थि कलश शामिल थे।
शर्मा ने बताया कि इस सेवा कार्य की प्रेरणा उन्हें सत्रह मई 2003 को मिली, जब दैनिक प्रताप और वीर अर्जुन के प्रधान संपादक अनिल नरेंद्र ने उन्हें श्मशान घाटों पर निर्धन परिजनों के शोषण की जमीनी हकीकत जानने भेजा था। वहां एक संन्यासी से हुई भेंट ने उनका ध्यान उन अस्थि कलशों की ओर खींचा, जिन्हें विसर्जन नसीब नहीं हुआ था। इसके बाद उन्होंने बिना किसी सार्वजनिक चंदे के सहयोगियों के साथ यह कार्य शुरू किया। उन्होंने अपने पिता के 2006 में हुए देहावसान के दिन को याद करते हुए कहा कि पिता की सीख के अनुसार उन्होंने पहले दफ्तर जाकर समाचार पत्र का संपादन और प्रकाशन सुनिश्चित किया, उसके बाद ही अंत्येष्टि में शामिल हुए।
वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए चिन्मय मिशन पटियाला के आचार्य स्वामी माधवानंद ने कठोपनिषद और श्रीमद्भगवद्गीता के आधार पर श्राद्ध के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन दर्शन में आत्मा को अजर और अमर माना गया है। भौतिक देह त्यागने के बाद आत्मा अपनी पूर्व संचित वृत्तियों और कर्मों के आधार पर अग्रसर होती है। ऐसे में वंशजों द्वारा श्रद्धा, संकल्प और दान से किया गया तर्पण उन जीवात्माओं के लिए संबल का कार्य करता है।
मुख्य अतिथि ब्रह्माकुमारीज संस्थान की राष्ट्रीय समन्वयक बीके चक्रधारी दीदी ने वृद्ध आश्रमों की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जीवित माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि देहावसान के बाद भी पूर्वजों के प्रति भेजे गए सात्विक विचार और शुभ भावनाएं उन तक पहुंचती हैं। रूस सहित कई देशों में अपने आध्यात्मिक प्रचार के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने सात्विक आहार, शाकाहार और नैतिक आचरण को जीवन में अपनाने पर जोर दिया।
सत्र के समापन पर पटना से साधक डॉ. ओम प्रकाश झुंझुनवाला ने ऋग्वेद के मंत्रों का संदर्भ देते हुए पूर्वजों के प्रति आत्मिक जुड़ाव को रेखांकित किया।
आरजेएस के राष्ट्रीय संयोजक उदय मन्ना ने अपने दिवंगत माता-पिता और सास-ससुर की स्मृति में आयोजित इस सत्र में घोषणा की कि पितृपक्ष के दौरान युवा पीढ़ी, विशेषकर जेन जी और जेन अल्फा को अपने पुरखों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ऑडियो-वीडियो संदेश तैयार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने चार अक्टूबर को पड़ने वाली मातृ नवमी पर माताओं के विशेष स्मरण का आह्वान किया। इन संस्मरणों को आगामी जनवरी में गणतंत्र दिवस और प्रवासी भारतीय दिवस पखवाड़े के अवसर पर प्रकाशित होने वाली पुस्तक में संकलित किया जाएगा।
प्रतिभागियों में आरजेएस पाॅजिटिव ब्रांच नोएडा के मानद प्रभारी उदय शंकर सिंह कुशवाहा, रिपब्लिक डे व प्रवासी भारतीय दिवस सम्मान अंतरराष्ट्रीय पखवाड़ा 2027 टीम (TRD27) की डा.रश्मि चौबे, स्वीटी पाॅल,आकांक्षा,नीति अरोड़ा, राजेन्द्र सिंह कुशवाहा, मयंक, सुदीप साहू, राकेश मौर्य और सोनू कुमार आदि उपस्थित रहे।
प्रतिभागियों में शामिल अधिवक्ता सुदीप साहू ने अपने पिता के अनुशासनात्मक मार्गदर्शन को याद किया, जबकि साहित्यकार डॉ. रश्मि चौबे ने अपने दादा-दादी द्वारा जातिवाद के विरोध और कन्या शिक्षा के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्ष को नमन किया। हैदराबाद से जुड़े राजेंद्र सिंह कुशवाहा ने अपने पिता और दादा के सामाजिक योगदान की चर्चा की, वहीं भारत मंडपम की पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक स्वीटी पॉल ने अपने पिता ओम प्रकाश सक्सेना और ससुराल पक्ष के संस्कारों को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया। नीति अरोड़ा ने भी अपने पूर्वजों को नमन करते हुए श्राद्ध और जनसेवा के पारस्परिक संबंध पर जिज्ञासा रखी।
आयोजकों ने आगामी उनतीस सितंबर को विश्व हृदय दिवस पर विशेषज्ञों की मौजूदगी में स्वास्थ्य परिचर्चा, शाकाहार जागरूकता दिवस तथा तीस नवंबर को नई दिल्ली स्थित भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी मुख्यालय पर रक्तदान संकल्प कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी दी।
आकांक्षा मन्ना
हेड क्रिएटिव टीम
आरजेएस पीबीएच
9811705015
Post a Comment