प्रकृति संरक्षण, नवरात्र व शाकाहार और बाल उत्सव रामलीला पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में मंथन व नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि
श्रीदेवोत्थान सेवा समिति का दिल्ली से 5,366 लावारिस अस्थि कलशों के साथ 26वीं विसर्जन यात्रा हरिद्वार के लिए रवाना
नई दिल्ली,
पितृपक्ष के समापन, वन्यजीव सप्ताह की पूर्णता और शारदीय नवरात्र तथा रामलीला के शुभारंभ के अवसर पर आरजेएस पीबीएच -आरजेएस पाॅजिटिव के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना द्वारा 8 अक्टूबर 2026 को आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में भारत, मॉरीशस और ब्रिटेन के चिंतकों ने पर्यावरण संरक्षण, नवरात्रि व सात्विक जीवनशैली और श्रीराम -जानकी के मानवीय मूल्यों की समाज में पुनर्स्थापना का आह्वान किया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि धार्मिक पर्वों और अनुष्ठानों की सार्थकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित रहने में नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदार आचरण अपनाने में है।
आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के 666वें अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन प्रकृति, श्रद्धा, शक्ति और श्रीराम-जानकी की मर्यादा: आश्विन मास के संस्कारों की त्रिवेणी विषय पर किया गया। आरजेएस साधक डा. ओमप्रकाश के दस दिवसीय आद्यशक्ति की आराधना और श्री राम -जानकी की मर्यादा के महत्व पर विडियो संदेश को प्रसारित किया जाएगा।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी गई और पितृपक्ष में श्रीदेवोत्थान सेवा समिति का दिल्ली से 5,366 लावारिस अस्थि कलशों के साथ 26वीं विसर्जन यात्रा हरिद्वार के लिए रवाना होने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में रामायण सेंटर, मॉरीशस की अध्यक्ष डॉ. विनोद बाला अरुण , इंडियन वेजिटेरियन एंड विगन सोसाइटी के संस्थापक और पॉजिटिव मीडिया यूके शाखा के प्रमुख नितिन मेहता (एमबीई), प्रकृति भक्त फाउंडेशन के संस्थापक और धार्मिक बाल उत्सव ट्रस्ट, दिल्ली के संरक्षक राजेश शर्मा , ब्रह्माकुमारीज डेरावल नगर, दिल्ली की प्रेरक वक्ता बीके लता बहन और मॉरीशस के शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्रालय के उप मुख्य अध्यापक व बहुभाषी लेखक डॉ. सोमदत्त काशीनाथ आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए प्रकृति भक्त फाउंडेशन के संस्थापक और धार्मिक बाल उत्सव ट्रस्ट, दिल्ली के संरक्षक राजेश शर्मा ने बताया कि 10 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक द्वारका सेक्टर 14 स्थित जनसभा ग्राउंड में एक विशेष रामलीला का मंचन किया जाएगा। यह रामलीला देश के अमर शहीदों की स्मृति और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को समर्पित होगी, जिसमें वृक्षारोपण और स्वच्छता से जुड़े विचार प्रसारित किए जाएंगे। वन्यजीव सप्ताह के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मनुष्यों ने वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास उजाड़ दिए हैं, जिससे पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ा है। उन्होंने धरती के सभी प्राणियों के प्रति सह-अस्तित्व और करुणा की भावना रखने की अपील की।
लंदन से जुड़े इंडियन वेजिटेरियन एंड विगन सोसाइटी के संस्थापक और आरजेएस पॉजिटिव ब्रांच,लंदन,यूके शाखा के मानद प्रभारी नितिन मेहता (एमबीई) ने बताया कि आगामी जनवरी माह में गणतंत्र व प्रवासी भारतीय दिवस के उपलक्ष्य में आरजेएस पीबीएच का दिल्ली से एक विश्व व्यापी "शाकाहार और जीव-दया अभियान" प्रारंभ किया जाएगा। इस अभियान के तहत लोगों को मांसाहार त्यागने का संकल्प दिलाया जाएगा और आगे चलकर दूध उत्पादों से परे विगन जीवनशैली अपनाने की दिशा में प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीव-दया भारत का विश्व को दिया गया सबसे बड़ा संदेश है और जलवायु संकट के दौर में प्रकृति के अनुकूल आहार अपनाना अनिवार्य हो चुका है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं रामायण सेंटर, मॉरीशस की अध्यक्ष डॉ. विनोद बाला अरुण ने कहा कि भारतीय त्योहार केवल उत्सव नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति और ऋतु परिवर्तन के साथ मानव जीवन के गहरे संतुलन का माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि भारत और मॉरीशस के मौसम में विपरीत स्थिति होने के बावजूद प्रवासी समाज में पर्वों की आस्था समान रूप से जीवंत है। नवरात्र के प्रतीकों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि मां काली शक्ति और शारीरिक सामर्थ्य की, मां लक्ष्मी साधन और समृद्धि की, तथा मां सरस्वती विवेक और विद्या की अधिष्ठात्री हैं। डॉ.विनोद बाला अरुण ने जानकारी दी कि मॉरीशस में रामायण सेंटर विजयादशमी पर अखंड रामायण पाठ और सांस्कृतिक मंचन के जरिए नई पीढ़ी को मर्यादा और त्याग के मूल्यों से जोड़ने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
मॉरीशस के शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्रालय के उप मुख्य अध्यापक व बहुभाषी लेखक डॉ. सोमदत्त काशीनाथ ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति को माता का दर्जा दिया गया है। अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पृथ्वी हमारी माता है तो नदियों को प्रदूषण से बचाना और वनों का संरक्षण करना हमारा बुनियादी दायित्व है। उन्होंने कहा कि मंदिरों में देवी की आराधना तब तक अधूरी है जब तक समाज में महिलाओं को वास्तविक सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा और समान अवसर न मिलें। डॉ. काशीनाथ ने दैनिक जीवन में प्रकृति संरक्षण, विवेकपूर्ण श्रद्धा, नारी सम्मान और श्रीराम-जानकी के मर्यादापूर्ण आदर्शों को अपनाने के चार संकल्प प्रस्तुत किए।
मुख्य वक्ता के रूप में जुड़ीं ब्रह्माकुमारीज डेरावल नगर, दिल्ली की प्रेरक वक्ता बीके लता बहन ने कहा कि श्रद्धा केवल देहावसान के बाद की रस्मों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जीवित अवस्था में माता-पिता और बुजुर्गों का आदर करना ही सच्ची श्रद्धा है। सात्विक आहार की महत्ता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भोजन बनाते समय ईश्वरीय स्मृति और सकारात्मक मंशा का भाव ही अन्न को प्रसाद का स्वरूप देता है। उन्होंने श्रीराम के विभिन्न दार्शनिक स्वरूपों की व्याख्या करते हुए कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम न बने, बल्कि उसके माध्यम से आंतरिक विकारों और बुराइयों रूपी रावण को समाप्त कर मर्यादा का पालन करने का संस्कार विकसित होना चाहिए।
उत्तराखंड से जुड़े पीतांबर मनोज ने हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण का प्रत्यक्ष अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले दो दशकों में जंगलों में तितलियों और पक्षियों की संख्या में चिंताजनक गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपभोगवादी संस्कृति ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है, जबकि पारंपरिक ज्ञान और आयुर्वेद प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने की राह दिखाते हैं।
कार्यक्रम में राजेंद्र सिंह कुशवाहा ,बिंदा मन्ना, सुनील कुमार सिंह,स्वीटी पॉल, अमृता घई, इशहाक खान , आकांक्षा , पीतांबर मनोज,बीके, मयंक राज आदि शामिल हुए।
पॉजिटिव मीडिया के राष्ट्रीय संयोजक उदय मन्ना ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बताया कि पटना से डॉ. ओमप्रकाश के नेतृत्व में नवरात्र और रामलीला के संदेशों को लेकर 10 दिवसीय वीडियो श्रृंखला चलाई जाएगी। उन्होंने इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के साथ मिलकर चलाए जा रहे रक्तदान जागरूकता अभियान और श्रीदेवोत्थान सेवा समिति द्वारा विजय शर्मा के नेतृत्व में 5,366 लावारिस अस्थि कलशों को हरिद्वार ले जाने वाली 26वीं विसर्जन यात्रा का भी ब्योरा दिया। कार्यक्रम के अंत में मन्ना ने अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की सूचना का उल्लेख करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अंतरराष्ट्रीय विमर्श की संपूर्ण कार्यवाही 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस पर जारी होने वाले मासिक न्यूजलेटर में प्रकाशित की जाएगी।
आरजेएस पीबीएच
8368626368
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