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राम-जानकी संस्थान पाॅजिटिव ब्राॅडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) की गुजरात परिक्रमा विश्व की सबसे ऊंची सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा को 25 फरवरी,2024 को नमन् कर प्रारंभ हुई , जिसका समापन 4 मार्च को साबरमती आश्रम,अहमदाबाद पहुंचकर संपन्न हो गई। दांडी कूच के उपलक्ष्य में रविवार 10 मार्च को आयोजित वेबिनार के अनुसार इस गुजरात परिक्रमा की मेजबानी श्री सत्य कबीर साहेब नी गद्दी ,श्री कबीर आश्रम जामनगर और बड़ोदरा निवासी प्रफुल्ल डी शेठ व रंजनबेन शेठ ने की, जिसमें साधु प्रेम सागर जी का सानिध्य प्राप्त हुआ।

  सचित्र वेबिनार का आरंभ अमीर खुसरो के दोहे ” खुसरो दरिया प्रेम का उल्टी बाकी धार, जो उतरा सो डूब गया,जो डूबा सो पार।”

10 मार्च,2024 सावित्रीबाई फुले, प्रथम हिन्दुस्तानी शिक्षिका की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी गई। 

24 फरवरी,2024 से आरजेएस पीबीएच संस्थापक उदय कुमार मन्ना के नेतृत्व व संयोजन  में 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने गुजरात के केवड़िया,बड़ोदरा, जामनगर,द्वारका, वेट द्वारका, पोरबंदर, मोचा‌ हनुमान मंदिर, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, सोमनाथ मंदिर,बरड़िया , खंभालिया, साबरमती और अहमदाबाद आदि जगहों की सफल  परिक्रमा की जिसे वेबिनार में सचित्र प्रस्तुत किया गया । 

प्रतिनिधि मंडल में दीपचंद माथुर,प्रो.बिजाॅन कुमार मिश्रा,प्रफुल्ल डी शेठ, रंजन बेन, साधु प्रेम सागर जी, सुरजीत सिंह दीदेवार, मनोहर मनोज,प्रफुल्ल पाण्डेय, बिंदा मन्ना और आकांक्षा मन्ना शामिल हुए जबकि अशोक कुमार मलिक आभासी जुड़े रहे। सभी ने अपनी-अपनी प्रेरक व सकारात्मक यात्रा वृत्तांत सुनाई।

अशोक कुमार मलिक ने सद्गुरु कबीर, गांधी,पटेल , सयाजीराव गायकवाड़ 3, डा.अंबेडकर, महर्षि अरविन्द, दादा भाई नौरोजी, श्यामजी कृष्ण वर्मा, भीकाजी कामा,हंसाजीवराज मेहता, उस्ताद मौला बक्स और विक्रम साराभाई को आरजेसियंस की ओर से श्रद्धांजलि दी। गुजरात परिक्रमा के दौरान गुजरात की एमएसयू , पारूल यूनिवर्सिटी, गुजरात युनिवर्सिटी, खंभालिया जिला पुस्तकालय, साबरमती आश्रम पुस्तकालय,श्री कबीर आश्रम, सहित रेलवे स्टेशन मास्टर्स, गुजरात पुलिस-वेट द्वारका और अन्य संस्थानों को आरजेएस पीबीएच का ग्रंथ -2 भेंट किया गया। सभी गुजरात परिक्रमा सफलतापुर्वक संपन्न कर वापस दिल्ली 4 मार्च को लौट आए।

 





नई दिल्ली। मारवाह स्टूडियो, फिल्म सिटी नोएडा में वैश्विक स्तर पर आयोजित तीन दिवसीय ग्लोबल फेस्टिवल ऑफ जर्नलिस्म (12-14 फरवरी) में आरजेएस पीबीएच की आगामी 13 फरवरी, 2024 की भागीदारी को ध्यान में रखते हुए उदय कुमार मन्ना, संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक, राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस- आरजेएस पॉजिटिव मीडिया द्वारा दिनांक पांच फरवरी को एक वेबिनार के माध्यम से मीडियाकर्मियों के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। श्री मन्ना ने बताया कि सकारात्मक पत्रकारिता की गूंज वैश्विक स्तर पर उठाने के लिए "अमृतकाल में पत्रकारिता का नया अंदाज" विषय पर चर्चा में आध्यात्मिक गुरु सुरजीत सिंह दीदेवार के सानिध्य में वरिष्ठ पत्रकार मनोहर मनोज,संजय राय,कवि अशोक कुमार मलिक, पैनलिस्ट दुर्गा दास आजाद और  युवा पत्रकार गुलशन सैफी व सोनू मिश्रा आदि शामिल हुए।

     चर्चा की शुरुआत करते हुए उदय मन्ना ने माना कि ऐसा नहीं है कि पत्रकारिता में सकारात्मकता नहीं है, लेकिन विकसित भारत के लिए और अधिक सकारात्मक पत्रकारिता की जरूरत है और आरजेएस पीबीएच इसी अनुरूप पिछले नौ साल से प्रयासरत है। वरिष्ठ पत्रकार श्री मनोहर मनोज ने कहा कि सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते प्रभाव से मीडिया में बदलाव आया है । इसकी आजादी के साथ संरक्षित और संवर्धित करने के लिए  संवैधानिक दर्जा देने की आवश्यकता है, जो न केवल सूचना देता है और मनोरंजन प्रदान करता है बल्कि जनता की स्पष्ट राय भी बनाता है।उन्होंने नया मीडिया आयोग की मांग की।

                "लोकतंत्र के प्रहरी मीडिया को सत्यता के अपने उद्देश्य से नहीं भटकना चाहिए।"

   इसके अलावा, समाचार, लेख और विज्ञापनों के क्षेत्र पर भी कुछ नीति होनी चाहिए।  मीडिया उद्योग अन्य उद्योगों से अलग है और आर्थिक व्यवहार्यता की समस्या का सामना करता है।
वरिष्ठ पत्रकार संजय राय ने आरजेएस पीबीएच की भूमिका की सराहना की और कहा कि सरकार की तरह मीडिया को भी लोगों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।  उन्होंने पत्रकारिता में राष्ट्र प्रथम की भावना पर बल दिया और अपनी शुभकामनाएं दीं.
 
  श्री अशोक कुमार मलिक, कवि और आरजेएस पीबीएच प्रवक्ता, इस बात से सहमत थे कि मीडिया के लिए संवैधानिक अधिकार सही दिशा में होंगे।  हालाँकि, उन्होंने समाज में सकारात्मकता पैदा करने की आवश्यकता पर जोर दिया जब तक कि पत्रकारिता एक बिंदु तक नहीं पहुंच जाता जहां समाज की समस्याओं को सकारात्मक भावना से निपटाया जा सके। आरजेएस पीबीएच ने समाज के लिए सकारात्मक संदेश का रास्ता चुना है।  हमारे संविधान में खूबसूरती से निहित प्रावधानों के बारे में जागरूकता शुरू से ही सभी में पैदा करने की जरूरत है ताकि यह हमारी सोच और व्यवहार का हिस्सा बन सके।
 
   युवा पत्रकार सोनू मिश्रा ने सकारात्मकता का मूल्य सिखाने के लिए आरजेएस के आंदोलन की सराहना की, जो समाज की भलाई के लिए पत्रकारिता के कार्यों में चुनौतियों का सामना करने में मदद करता है।  उन्होंने बताया कि पत्रकारों को प्रभावी ढंग से संवाद करना सीखना होगा।
 
  पत्रकार गुलशन सैफी की राय थी कि सकारात्मक पत्रकारिता समाज को बेहतर बना सकती है और यह समाज को नुकसान पहुंचाने वाली नकारात्मक पत्रकारिता के विपरीत सम्मानजनक है। सकारात्मक मीडिया उन युवा पत्रकारों के सामने चुनौतियों को कम करता है जिन्हें अपनी नौकरी की आवश्यकताओं, अपने पारिवारिक जीवन और सामाजिक समस्याओं को उचित रूप से उजागर करने की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाना होता है।  आरजेएस पीबीएच जैसे सकारात्मक मीडिया दवा की तरह है।
 
  आरजेएस पैनलिस्ट दुर्गादास आज़ाद ने राष्ट्र निर्माण के लिए मीडिया में सकारात्मकता की आवश्यकता पर बल दिया।
धन्यवाद ज्ञापन आरजेएस पीबीएच के आध्यात्मिक गुरु सुरजीत सिंह दीदेवार ने दिया और कहा कि  समाज में छुपी प्रतिभाओं को सकारात्मक पत्रकारिता से ही उजागर और समाज में सकारात्मक कार्यों को प्रोत्साहित किया जा सकता है , वही आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया कर रहा है।

   निष्कर्ष में, इस बात पर सहमति हुई कि विकसित भारत के लिए देश में सकारात्मक पत्रकारिता की आवश्यकता है और यह देखा गया कि आरजेएस पीबीएच सकारात्मक उद्देश्यों पर है, जिसने सामाजिक-केंद्रित विषयों पर 163 आरजेएस सकारात्मक बैठकें , 160 उदय मन्ना फेसबुक लाइव और आजादी का अमृत महोत्सव: अमृत काल का सकारात्मक भारत के 202 वेबिनार/ फिजिकल बैठकें आयोजित किए हैं।  सकारात्मक विषयों पर और स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र-निर्माताओं को श्रद्धांजलि देते हुए, विभिन्न राज्यों की 9 यात्राएँ की हैं और 24 फरवरी 2024 से आरजेएस ऑब्जर्वर दीपचंद माथुर के सानिध्य में गुजरात की दस दिवसीय यात्रा होने वाली है। अपने सकारात्मक मीडिया प्रयासों को अपनी पुस्तक में दर्ज किया और 2047 तक सकारात्मक संवाद जारी रखने का संकल्प लिया है। 


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